इल्तिजा - Factsnfigs

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इल्तिजा



मैं इस परफॉरमेंस की वस्तु हूं।

कुछ ने हिलाया-डुलाया। हाथ-पांव हिलाए। उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर खड़ा कर दिया।

यौन उत्पीड़न/Sexual harassment- इस शब्द के बारे में जानते तो सब हैं लेकिन कितनी गहराई से ?

अगर आपको अंदाजा लगाने को कहा जाए की मानवता किसी को कितना उत्पीड़ित कर सकती है शायद एक स्टीक जवाब देना आपके लिए मुश्किल होगा।

इसकी एक जीवंत उदाहरण है मरीना अब्रामोविच जो कि यूगोस्लाविया से ताल्लुक रखने वाली एक परफॉरमेंस आर्टिस्ट हैं।  किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकने की ताकत रखने वाली उनकी Rhythm 0" (1974)  की परफॉरमेंस आपको खुद को टटोलने, अपने और दूसरों के दर्द, दुख का एहसास करने , अपने शरीर से बात करने पर मजबूर करती है।


एक इंसान ,उसकी मानवता किस हद तक जा सकती है , ये बाखूबी बयाँ होता है इस कलाकार की परफॉरमेंस में। 


इस परफॉरमेंस को इटली के नेपल्स शहर में साल 1974 में पेश किआ गया था।

6 घंटे चली इस परफॉरमेंस में मरीना ने कुछ भी नहीं किया था। वो सारे कपड़े उतारकर बस खड़ी रहीं। पास में एक टेबल था। टेबल पर 72 चीजें रखी हुई थीं। वहां आए लोगों को उन 72 चीजों में अपनी पसंद की चीज से मरीना के साथ कुछ भी करना था। मरीना ने लिखा था कि उनके साथ जो भी कुछ होता है, उसकी जिम्मेदारी वो खुद लेंगी।

इस परफॉरमेंस में कोई स्टेज नहीं था. उनका लक्ष्य बस इतना था: वो देखना चाहती थीं कि ऐसी स्थिति में पब्लिक किस हद तक जा सकती है।

निर्देश ऐसे थे:

टेबल पर 72 चीजें हैं। लोग इनमें से कितनी भी चीजें मेरे ऊपर इस्तेमाल कर सकते हैं।

मैं इस परफॉरमेंस की वस्तु हूं।
इस दौरान जो भी होगा उसकी जिम्मेदारी मेरी होगी।

समय: 6 घंटे (शाम 8 से रात 2 बजे तक)

पहले तो उनके करीब केवल फोटोग्राफर आए।

फिर लोग आने शुरू हो गए। पहले तो केवल उन्हें देखते रहे।

कुछ ने उन्हें हिलाया-डुलाया। हाथ-पांव हिलाए। उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर खड़ा कर दिया।


फिर लोग टेबल की ओर बढे।

टेबल पर सुंदर वस्तुओं से लेकर खतरनाक वस्तुएं थीं। पंख और फूल थे। ब्लेड, चाकू और बंदूक भी थे।

लोगों ने मरीना के ऊपर चीजें टांग दीं। रस्सी से बांधा।

एक व्यक्ति ने उन्हें ब्लेड से काट दिया।

एक और व्यक्ति ने उन्हें लोडेड बंदूक खुद पर तानने के लिए कहा।

एक व्यक्ति ने उन्हें नग्न कर उनका शरीर जहां-तहां छुआ।
                                                         
लोगों को इसपर भी सुकून नहीं पड़ा। उन्होंने मरीना के शरीर में कांटे भोंक दिए।

जब परफॉरमेंस ख़तम हुई, यानी 6 घंटे बाद, मरीना ने कमरे में चलना शुरू किया।




हर एक व्यक्ति के पास गईं। आंखों में आंखें डालकर खड़ी हो गईं। वे लोग जो उनको कुछ देर पहले हैरेस कर रहे थे, अब उनकी आंखों में भी नहीं देख पा रहे थे।


और कुछ तो उसका सामना करने से पहले ही वहां से खिसक चुके थे।

मरीना ने उन्हें उनके अंदर का राक्षस दिखा दिया था।

ये राक्षस तब भी ज़िंदा था आज भी ज़िंदा है।

लोगों का , भीड़ का रवय्या तब भी शर्मसार करने वाला था आज भी शर्मसार करने वाला है।

मरीना का कहना था -

इस परफॉरमेंस ने ये बताया कि इंसानियत की सबसे बुरी चीज क्या है. लोग आपको असहाय पाकर आपको पीड़ा देने का एक भी मौका नहीं गंवाते. ये बताता है कि कितना आसान है किसी इंसान को वस्तु बनाकर उसके साथ बुरा बर्ताव करना. खासकर जब वो इंसान कमज़ोर हो, और लड़ने की शक्ति न रखता हो. इससे पता चलता है कि अगर लोगों को मौका मिले, उन्हें राक्षस बनने में ज़रा भी वक़्त नहीं लगता.

ये लोग कोई और नहीं, हम हैं। हम वही भीड़ हैं जो सड़क पर चलती लड़कियों के स्तन निचोड़ देती है। कूल्हे पकड़ लेती है। जो एक्सीडेंट कर भाग जाती है। जो बेजुबान कुत्तों को मारकर जला देती है। जो पिटते हुए व्यक्ति का वीडियो बनाकर मजे लेती है।जो लोगों की कमियों पर हंसती है। जो किसी पॉकेटमार या शराबी को पा जाए तो पीट-पीटकर अधमरा कर देती है।

ये हम ही हैं, जो रात में चलती बस में लड़की का रेप कर उसकी योनि में रॉड घुसाकर उसके अंतड़ियों तक ज़ख़्मी कर देती है। और उसके दोस्त को पीटकर फेंक देती है।

हम वो लोग हैं, जो हिंसा करने के पहले एक पल भी नहीं सोचते। हम क्रूर हैं। और शायद हमें मरीना जैसी कोई स्त्री मिल जाए, तो हम उसका यौन उत्पीड़न कर उसके कच्चा खा जाएं।

मूक आचरण , चेहरे पर दृढ़ता, आंखों में कठोरता, मिश्रित दर्द- क्या आपने इन सब  भावों को किसी के अंदर एक साथ देखा है , अगर कभी देखेंगे तो ये रिदम जीरो के पीछे के भाव को याद कीजियेगा शायद कुछ हिस्सा दे पाएं इस कीचड़ बन चुके समाज को कुछ हद तक साफ़ करने में।

बस यही इल्तज़ा है हमारी आपसे, इस समाज से और खुद से।

 

 

Source of Rhythm 0" (1974)

https://www.youtube.com/watch?v=xTBkbseXfOQ&feature=youtu.be





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